हिंदी व्याकरण । भाषा बोली और व्यकारण | Hindi Vyakaran

Category : General Knowledge | Sub Category : Hindi GK Posted on 2019-04-12 10:40:25


हिंदी व्याकरण । भाषा बोली और व्यकारण | Hindi Vyakaran

भाषा बोली लिपि और व्याकरण

संपूर्ण प्राणीजगत में मानव सर्वश्रेष्ट है। इसका कारण है मानव के पास ऐसी दो चीजे है जो अन्य प्राणियों के पास नही है। एक है उसकी जिज्ञासा बुद्धधि तथा दूसरी भाषा। बुद्धधि द्वारा वह निरंतर सोचता है, चिंतन मनन करता है और भाषा द्धारा वह अपने मन के भावों तथा विचारों को प्रकट करता है। भाषा द्वारा हम न केवल अपने विचार प्रकट करते है अपितु दूसरो के विचार भी जान सकते है। इस प्रकार नये विचार जन्म लेते है। तथा भाषा का विकास होता है। भाषा शब्द की उत्पति भाष धातु से हुई है जिसका का अर्थ है वाणी । वाणी द्धारा उच्चारित सार्थक ध्वनियाँ ही भाषा का आधार होता है। मनुष्य  द्वारा अपने विचारों के परस्पर आदान-प्रदान के माध्यम को भाषा कहते है।

 भाषा द्वारा हम अपने विचारों को दो प्रकार से अभिव्यक्त करते है। बोलकर तथा लिखकर। इस आधार पर भाषा के दो रुप होते है।

1. मौखिक भाषा

मौखिक भाषा में हम विचारों को मुख से बोलकर व्यक्त करते है। वार्तालाप, वाद-विवाद, कविता पाठ, भाषण, नाटक, फिल्म, संगीत आदि में हम भाषा का मौखिक रुप प्रयोग करते है।

2.लिखित भाषा

लिखित भाषा में हम अपने विचार लिखकर प्रकट करते है। लिखित भाषा का प्रयोग पुस्तकों, समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं, सुचना-पट आदि में किया जाता है। मौखिक तथा लिखित भाषा द्वारा हम भाषा के चार कौशल सीखते है। मौखिक भाषा में जहाँ बोलना तथा सुनना महत्वपूर्ण है, वही लिखित भाषा में पढना तथा लिखना महत्वपूर्ण है।

विश्व के अलग-अलग भागों में भिन्न-भिन्न भाषाएँ बोली जाती है। भाषा का क्षेत्र व्यापक होता है। हिंन्दी, अंग्रेजी, चीनी, जापानी, रुसी, स्पेनिश, अरबी, फारसी, पुर्तगाली आदि विश्व की कुछ प्रमुख भाषाएँ हैं।

बोली

जब एक भाषा अनेक स्थानों पर बोली जाती है तो उसके स्थानीय रुप विकसित हो जाते है। भाषा के स्थानीय या क्षेत्रीय रुप को बोली कहते है। बोली में लोकगीत गाए जाते हैं। कहावतें तथा लोककथाएँ कही जाती है। बोलियों का अपना कोई लिखित साहित्य नहीं होता। हिंन्दी की कई बोलियाँ है। उदाहरण-अवधी, ब्रज, मगही, हरियाणवी, राजस्थानी, कुमाँऊनी, गढवाली, बुंदेलखण्डी आदि। जब किसी बोली में साहित्य लिखा जाने लगता है तो वह बोली उपभाषा बन जाती है। ब्रज और अवधी हिंन्दी की बोलियाँ है। पर कालांतर में वे उपभाषाएँ बन गई। हिंन्दी के प्रसिद्ध कवि सूरदास ने ब्रज भाषा में सूरसागर की तथा महाकवि तुलसीदास ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचाना की।

हिंन्दी की बोलियाँ

कहाँ बोली जाती है

हिंन्दी की बोलियाँ

कहाँ बोली जाती है

अवधी

उत्तर प्रदेश

ब्रज

उत्तर प्रदेश

हरियाणवी

हरियाणा

राजस्थानी

राजस्थान

कुमाऊनी

उत्तरांचल

बुंदेलखंडी

उत्तर प्रदेश

 

साहित्य

ज्ञान के संचित कोश को साहित्य कहते है। साहित्य दो प्रकार का होता है। गद्य साहित्यऔर पद्य साहित्य

गद्य साहित्य के अंतर्गत कहानी, नाटक, निबंध, उपन्यास, संस्मरण, जीवनी, यात्रा, पत्र लेखन आदि आते है।

पद्य साहित्य के अंतर्गत तुकांत तथा अतुकांत कविता, दोहा, चोपाई, सोरठा, छंद, कुंडलियाँ, पद आदि आते है।

मानक भाषा

एक भाषा की कई बोलियाँ होती है पर मानक रुप एक ही होता है। जैसे-हिंन्दी की अनेक बोलियाँ है पर उसका मानक रुप खडीबोली है। हिंन्दी का यही रुप पुस्तकों, समाचार-पत्रों तथा रेड़ियों में प्रयोग किया जाता है। भाषा के सर्वमान्य तथा स्वीकृत रुप को मानक भाषा कहते है।


मातृभाषा

मातृभाषा वह भाषा होती है जिसे बच्चा सबसे पहले अपनी माँ से सीखता है। यदि माँ बांग्ला भाषा बोलती है तो बच्चा उससे बांग्ला सीखता है। बांग्ला ही उसी मातृभाषा कहलाएगी। इसी प्रकार यदि बच्चा अपनी माँ से गुजराती सीखता है तो गुजराती उसकी मातृभाषा होगी। अलग-अलग प्रांतो में रहने वाले लोगों की मातृभाषा इसी कारण भिन्न-भिन्न होती है।


राजभाषा

राजभाषा अर्थात राज-काज की भाषा। जिस भाषा का प्रयोग सरकारी कार्यलयों में काम-काज के लिए किया जाता है, वह राजभाषा कहलाती है। भारत में सरकारी कार्यालयों में काम-काज के लिए हिंदी तथा अंग्रेजी दोनों भाषाओं का प्रायोग किया जाता है।

14 सितंबर, 1949 को भारतीय संविधान के (अनुच्छेद 343) के अंतर्गत हिंदी को भारत की राजभाषा घोषित किया गया। इसलिए 14 सितंबर का दिन हिंदी दिवस के रुप में मनाया जाता है।

लिपि

आरंभ में मनुष्य बोलकर अपने विचार प्रकट करता था। कालांतर में उसने अपने विचारों को स्थायी रुप देने तथा अपने विचारों को दूसरों तक पहुँचाने के लिए चित्रों को माध्यम बनाया, जिससे चित्रलिपि का जन्म हुआ। फिर उसने मुख से उच्चरित ध्वनियों के लिए कुछ चिह्नों का प्रयोग किया। यहीं चिह्न लिपि कहलाए । प्रत्येक भाषा की अपनी लिपि होती है। विश्व की कुछ प्रमुख लिपियाँ है।

भाषा

लिपि

भाषा

लिपि

अंग्रेजी,फ्रैंच,स्पेनिश,जर्मन

रोमन

पंजाबी

गुरुमुखी

उर्दू

फारसी

बांग्ला

बांग्ला

तमिल

तमिल

अरबी

अरबी

चीनी

चित्रलिपि

हिंदी,संस्कृत,नेपाली

देवनागरी

 

Note- ब्राह्मी लिपि से देवनागरी लिपि का विकास हुआ है। इसे नागरी लिपि के नाम से भी जाना जाता है। हिंदी का जन्म संस्कृत से हुआ है।


व्याकरण

प्रत्येक भाषा अपने आप में विशिष्ट होती है। उसके मौखिक तथा लिखित रुप को सही ढंग से समझने के लिए व्याकरण का ज्ञान होना आवश्यक है। व्याकरण द्वारा हमें भाषा के नियमों की जानकारी मिलती है। इसके द्वारा हम भाषा को शुद्ध रुप से बोलना, पढना तथा लिखना सीखते है। व्याकरण वह शास्त्र है जो हमें किसी भाषा के नियमों को सिखाकर उसके शुद्ध रुप से परिचित कराता है।


व्याकरण के अंग

व्याकरण के मुख्य तीन अंग है।

1.वर्ण-विचार

भाषा की मूल ध्वनियों के लिखित रुप वर्ण कहलाते है। वर्ण-विचार में वर्णो के अकार, उच्चारण, वर्गीकरण आदि के विषय में विचार किया जाता है।

2 शब्द-विचार

वर्णो के मेल से शब्द बनते है। शब्द-विचार के अंतर्गत शब्दों के भेद, उनकी उत्पत्ति तथा रचना आदि से संबंधित जानकारी प्राप्त होती है।

3 वाक्य-विचार

शब्दों के सार्थक मेल से वाक्य बनते है। वाक्य-विचार में वाक्यों के अगं, भेद, वाक्य विश्लेषण, विराम-चिह्न आदि के विषय में विचार किया जाता है।

कम्प्यूटर और हिंदी भाषा

आज हिंदी का व्यवहार क्षेत्र निरंतर फैलता जा रहा है। इसे बोलने, सीखने वालो की संख्या बढती जा रही है। विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढाई जा रही है। अतः हिंदी शिक्षण तथा अध्यापन के क्षेत्र में कंप्यूटर का भी प्रवेश हो चुका है तथा वह दिन-प्रतिदिन बढता जा रहा है। हिंदी के अखबार तथा पत्रिकाएँ इसके द्वारा पढे जा सकते है। अनेक ऐसी वैबसाइट है जिनसे हमें हिंदी साहित्याकारों के बारे में जानकारी मिलती है। इंटरनेट के द्वारा हिंदी में हम ई-मेल भेज सकते है और ब्लाँग भी हिंदी में बना सकते है। यही नहीं इंटरनेट के द्वारा हिंदी भाषा घर बैठे भी सीखी जा सकती है।


हिंदी के विषय में कुछ विशिष्ट जानकारी

1.हिंदी के पहले व्याकरण की रचना डच विद्वान (केटलाग) ने की थी।

2.हिंदी साहित्य का पहला इतिहास फ्रांसीसी विद्वान (गार्सा द तासी) ने लिखा।

3.हिंदी भाषा के पहले हिंदी समाचार-पत्र (उदंत मार्तड) का प्रकाशन सन 1926 में कोलकता से हुआ।

4.हिंदी भाषा की पहली फिल्म (आलमआरा) थी।

5.हिंदी भाषा की पहली आधुनिक कहानी (उसने कहा था) थी।

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Kajal Garg
at 2019-04-16 12:55:18
nice artical.....